सैलरी कैलकुलेटर

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टैक्स व्यवस्था |
हाथ में आने वाली रकम कटौतियाँ
मासिक हाथ में आने वाली रकम —
सालाना इनकम टैक्स —
सालाना PF कटौती —

* सरल अनुमान: सिर्फ़ भारतीय स्लैब, HRA/भत्तों का हिसाब नहीं।
कटौतियाँ = इनकम टैक्स + PF + प्रोफ़ेशनल टैक्स।

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यह कैसे काम करता है

यह आपके सालाना CTC (कॉस्ट टू कंपनी) को भारतीय टैक्स नियमों के तहत मासिक हाथ में आने वाली सैलरी में बदलता है: स्टैंडर्ड डिडक्शन लगाकर (नई व्यवस्था में ₹75,000, पुरानी में ₹50,000), आपके डाले PF और प्रोफ़ेशनल टैक्स, फिर लागू इनकम टैक्स स्लैब, ताकि पता चले कि हर महीने असल में आपके खाते में कितना आता है।

आम सवाल

पुरानी और नई व्यवस्था में स्टैंडर्ड डिडक्शन अलग क्यों है?

हर व्यवस्था का ढाँचा फ़िलहाल ऐसा ही है। नई व्यवस्था की ₹75,000 की सीमा ख़ासतौर पर इसलिए बढ़ाई गई ताकि कटौतियों के बाद वह ज़्यादा आकर्षक रहे, जबकि पुरानी व्यवस्था में ₹50,000 रहता है पर बहुत-सी कटौतियाँ (HRA, 80C वग़ैरह) मिलती हैं, जो नई व्यवस्था में ज़्यादातर नहीं मिलतीं।

क्या इसमें HRA या दूसरी छूटें गिनी जाती हैं?

सिर्फ़ वही जो आप पुरानी व्यवस्था में कटौती के रूप में डालें। यह आपके किराये और सैलरी के ढाँचे से HRA छूट अपने-आप नहीं निकालता, क्योंकि वह कई ऐसे इनपुट पर निर्भर है जो यह कैलकुलेटर नहीं पूछता।