यह कैसे काम करता है
यह नई और पुरानी, दोनों व्यवस्थाओं के लिए भारतीय इनकम टैक्स स्लैब-दर-स्लैब निकालता है, धारा 87A की छूट (छूट की सीमा तक शून्य टैक्स) और 4% हेल्थ-एंड-एजुकेशन सेस सहित, और सिर्फ़ अंतिम संख्या नहीं, ठीक-ठीक दिखाता है कि आपकी आमदनी का कितना हिस्सा हर स्लैब में आता है।
आम सवाल
मुझे कौन-सी व्यवस्था चुननी चाहिए, पुरानी या नई?
यह इस पर निर्भर है कि आप कितनी कटौतियाँ क्लेम करते हैं। पुरानी व्यवस्था का कम बेस टैक्स तभी फ़ायदे में रहता है जब आपकी कटौतियाँ (80C, HRA, होम लोन का ब्याज वग़ैरह) उसके ऊँचे स्टैंडर्ड डिडक्शन के अंतर को पाट सकें। अपने असली आँकड़ों के साथ यहाँ दोनों व्यवस्थाएँ आज़माइए, देखिए किसमें कम आता है।
धारा 87A की छूट क्या है?
यह एक ऐसा प्रावधान है जो आपकी कर योग्य आय एक सीमा से कम होने पर (नई व्यवस्था में फ़िलहाल ₹7 लाख) आपका टैक्स शून्य कर देता है, भले स्लैब की गणना अकेले कुछ टैक्स दिखाती। यह अलग छूट के रूप में लगता है, स्लैब की दर के रूप में नहीं।